भ्रष्टाचार पर निबंध (Essay on Corruption In Hindi)

भ्रष्टाचार पर निबंध (Essay on Corruption In Hindi)

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भ्रष्टाचार एक कलंक पर निबंध (Corruption Essay In India)


प्रस्तावना


भ्रष्टाचार एक ऐसी समस्या है जिससे कोई देश अछुता नहीं है आज प्रत्येक कार्य में रिश्वत लेकर काम करने की आदत बन गयी है भारत में भ्रष्टाचार की समस्या सबसे ज्यादा गंभीर है  

भ्रष्टाचार आज से ही नहीं ये काफी लम्काबे समय से चला आ रहा है ये उसी दीमक की तरह है जो बढ़ते हुए पौधे की वृद्धि को रोकर कर उसको नष्ट कर देती है ठीक इसी प्रकार भ्रष्टाचार देश की प्रगति को रोक कर बर्बादी की और ले जाता है 

आज प्रत्येक क्षेत्र में भ्रष्टाचार व्याप्त है किसी भी कार्य को करने के लिए रिश्वत मांगी जाती है जिससे गलत कार्य को बढ़ावा मिलने से लोगो में असंतोष पैदा हो गया है 

भ्रष्टाचार का शिकार प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में हुआ है मगर उसके प्रति गंभीर नहीं होने से भ्रष्टाचार को और ज्यादा फैलने में मदद मिली है 

भ्रष्टाचार एक व्यवसाय बन चूका है जिसमे हर छोटे मोटे कम के लिए घुस ली जाती है भ्रष्टाचार फैलने में हम स्वयं ही जिम्मेदार होते है और हम ही बार बार इसके शिकार होते है भ्रष्टाचार का जन्म तीन कारणों से होता है भ्रष्टाचार करने वाला, रिश्वत देने  वाला और भ्रष्टाचार के अपराध को सहने वाला    

भ्रष्टाचार आज हर एक कार्य के क्षेत्र में फैल चुका है। भ्रष्टाचार विभिन्न क्षेत्र व्याप्त है जैसे सरकारी/सार्वजनिक क्षेत्र में, राजनैतिक भ्रष्टाचार, पुलिस द्वारा भ्रष्टाचार, न्यायिक भ्रष्टाचार, शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार, श्रमिक संघों का भ्रष्टाचार, धर्म में भ्रष्टाचार, दर्शन में भ्रष्टाचार, उद्योग जगत का भ्रष्टाचार।


भ्रष्टाचार किसे कहते है  (What is Corruption)


भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है, भ्रष्ट+आचार = भ्रष्टाचार, अर्थात् भ्रष्ट मतलब बुरा या बिगड़ा हुआ एवं आचार का अर्थ है- आचरण। भ्रष्टाचार के अर्थ से तात्पर्य स्पष्ट है कि वह आचरण जो किसी भी प्रकार से अनुचित और अनैतिक कार्य में लिप्त हो भ्रष्टाचार के अर्थ को सरल तरीके से परिभाषित किया जा सकता है – खराब आचरणवाला अर्थात बेईमान।

भ्रष्टाचार का मतलब है गलत आचरण अर्थात किसी भी काम को अगर अपने फायदे के लिए या नियमों के खिलाफ जा कर या गलत तरीके से करवाना भ्रष्टाचार कहलाता है। लोग पैसो के लालच में अनुचित काम/ गलत काम करते है जो की भ्रष्टाचार है। लाभ लेकर भ्रष्टाचार करने वाला व्यक्ति भ्रष्टाचारी कहलाता है।


भ्रष्टाचार का कारण  (Reason of Corruption)


भ्रष्टाचार अलग अलग तरह से होता है इनमे से कुछ ऐसे तरीके है जो जिन्हें आप अक्सर सुनते रहते है नीचे दिए गये तरीको से भ्रष्टाचार फैलता है

  • घूस (रिश्वत)।
  • चुनाव में धांधली।
  • हफ्ता वसूली।
  • जबरन चन्दा लेना।
  • विवेकाधिकार का दुरुपयोग।
  • भाई-भतीजावाद (Nepotism)
  • अपने विरोधियों को दबाने के लिये।
  • सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग।
  • न्यायाधीशों द्वारा गलत या पक्षपातपूर्ण निर्णय।
  • कालाबाजारी करना।
  • टैक्स चोरी, झूठी गवाही, झूठा मुकदमा, परीक्षा में नकल।

भ्रष्टाचार कैसे  फैलाते है?


आजाद भारत में भ्रष्टाचार एक दिमक की तरह जम चूका है जिससे निकलना मुश्किल होता जा रहा है आज समाज और सरकार का कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं बचा जहाँ भ्रष्टाचार न फैला हो। 2G घोटाला व 1 लाख 2300 करोड़ का राष्ट्रीय मंण्डल खेल घोटाले ने तो एक सवालिया निशान बन गया है।

  • ठेकेदार सरकारी ठेके में भ्रष्टाचार करता है।
  • न्यायाधीश गलत न्याय के नाम पर लूटता है।
  • पत्रकार खबर को दबाने व झूठे प्रचार के लिए रिश्वत ले लेता हैं।
  • शिक्षक शिक्षा बेचने पर उतारु रहते हैं।
  • डाक्टर इंसान के अंग बेचने लालच में भ्रष्टाचार करते  हैं।
  • पुलिस वाले अपराधी को बचने के लिए रिश्वत लेते है
  • इन्ही कारणों की वजह से आज भ्रष्टाचार देश में बढ़ता ही जा रहा है।

भ्रष्टाचार के दुष्प्रभाव


देश मे भ्रष्टाचार के होने से देश की बुरी दुर्दशा होती जा रही है देश का विकास आशा से भी ज्यादा कम हो गया है लोगो में असंतोष और रिश्वत देने पर काम होने की धारणा बनती जा रही है इससे गरीब ज्यादा गरीब व अमीर और अमीर होता जा रहा है। भ्रष्टाचार के बहुत से दुष्प्रभाव होते है

  • भ्रष्टाचार के कारण देश की आर्थिक विकास पर रोक लग गयी है।
  • भ्रष्टाचार के कारण से समाज में अराजकता का जन्म हुआ।
  • काले धन में वृद्धि हुई।
  • अमीर – गरीब के बीच भेदभाव को बढ़ावा मिला।
  • जातिवाद और भाषावाद के बीच व भेदभाव को बढ़ावा मिला।
  • नैतिक मूल्यों का ह्मस।
  • जनता में असंतोष पैदा हो गया है।
  • रिश्वत देने की आदत लोगो में बढती जा रही है।
  • इन्सान से इन्सान के बींच इंसानियत कम हो रही है

भ्रष्टाचार को दूर करने के उपाय


  • देश लोकपाल कानून लागू करने के लिए आवश्यक है।
  • देश संक्षिप्त और कारगर कानून हो।
  • कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान हो
  • देश मे प्रशासनिक मामलों में पारदर्शिता बनाए और जनता को भागीदार बनाए।
  • देश के न्यायालय मे मामला त्वरित निपटारा हो।
  • कानून और सरकार पर से लोगों की मानसिकता बदलने कि आवश्यकता है।

भ्रष्टाचार के क्षेत्र


  • मीडिया 
  • न्यायपालिका 
  • पुलिस 
  • सेना
  • शिक्षा
  • चुनाव 

मीडिया में भ्रष्टाचार


आज मीडिया पर लोग सबसे ज्यादा विश्वास करते है हमे जो खबर देते हम उसी को मान लेते है मीडिया की बड़ी बड़ी एजेंसी के सभी मालिक आज आमिर है क्योंकि नेताओ के साथ इनकी साठगांठ रहती है ये एक दुसरे मिले हुए रहते है

मीडिया से नेताओ को फायदा मिलने पर इसकी अच्छी खासी रकम मीडिया को मिलती है, में ये नहीं कहता की सभी मीडिया ऐजेंसी ऐसी है मगर भ्रष्टाचार का शिकार तो मीडिया हो ही चूका है

कोई भी बड़ी घटना होती है तो उसमे हमेशा बड़े राजनेताओ या किसी आमिर घराने का नाम ही आता है क्योंकि वो पैसे के दाम पर खबर को दबा दबा देते है

अगर खबर दब नहीं पाए तो पीड़ित को लाभ देकर दबाने की कोशिश करते है या उस खबर के लिए झूटा बता कर पेश किया जाता है अधिकतर बड़े बड़े पुलिस अधिकारी या कोई उच्चे पद के लोगो पर कोई इल्जाम लगता है

तो वहा उल्टा पीड़ित पर ही झुटा इल्जाम लगाकर उसे बदनाम करने की कोशिश करते है क्योंकि उनकी अच्छी खासी जानकारी मीडिया के लोगो से होती है जिनके इशारे पर मीडिया काम करता है

  • आर्थिक शोषण

छोटे और बड़े मीडिया हाउसों में 15 सौ रूपये के मासिक पर पत्रकारों से 10 से 12 घंटे काम करवाया जाता है। ऊपर से प्रबंधन की मर्जी, जब चाहे नौकरी पर रखे या निकाल दे। इनका वेतन  दिहाड़ी मजदूरों की तरह होता है।

जिनके लिए रोजाना दिहाड़ी पाना मुश्किल है ऐसे में यह चिंतनीय विषय है कि एक छोटे जिले, या कस्बा या ब्‍लॉक का पत्रकार, अपनी जिंदगी पानी और हवा पी कर तो नहीं गुजारेगा? लाजमी है कि खबर की दलाली करेगा?

अधिकतर कई छोटे-मंझोले मीडिया हाउसों में कार्यरत पत्रकारों को कभी तय समय पर तनख्वाह नहीं मिलती है। इसलिए छोटे स्तर पर भ्रष्ट मीडिया को स्वीकारने के पीछे, पत्रकारों का आर्थिक कारण को एक हद तक मजबूरी का नाम दिया जा सकता है।


न्यायपालिका में भ्रष्टाचार


देश की कानून व्यवस्था सबसे अहम् होती है जो अपराधी को सजा और पीड़ित को न्याय का फैसला करती है मगर न्यायपालिका भ्रष्टाचार का एक अड्डा है जहा सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार होता है

भ्रष्टाचार ने न्याय की बुनियाद को भी समाप्त कर दिया है न्यायपालिका सबसे महंगे और खर्चीली है भारत में न्याय प्रणाली सबसे धीमी गति से चलती है

न्यायालय में दोषी व्यक्ति अपराधी घोषित होने पर भी उसे सजा दिलाने में काफी समय लग जाता है और दूसरी तरह न्याय मिलने में उम्र बीत जाती है

ज्यादतर अपराध करने वाले बड़े घराने से होते है जिनका रिश्ता बड़े बड़े नेताओ से होता है पैसे और राजनीति के संबंधो  के दम पर गवाह और न्यायाधीश को खरीद लेते है

न्यायाधीश चंद पैसो के लालच में न्याय को ताक पर रख कर अपराधियों को बचा लेते है इससे अपराधी के अपराध करने की और हिम्मत बढ़ जाती है

न्यायालय में गरीब अपनी जमा पूंजी से केस लड़ता है इसके लिए वो वकील करता है मगर वकील भी पैसे के लालच में दोषी व्यक्ति के साथ मिल जाता है जिससे निर्दोष व्यक्ति भ्रष्टाचार का शिकार हो जाता है

न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार में – घूसखोरी, भाई भतीजावाद, लंबी न्याय प्रक्रिया, न्यायालयों की भारी कमी और पारदर्शिता की कमी, कर्मचारियों का भ्रष्ट आचरण आदि जैसे कारकों की प्रमुख भूमिका है।


पुलिस


पुलिस कर्मचारियों द्वारा कई तरह से भ्रष्टाचार फैलाया जाता है पुलिस कर्मचारियों और नेता का तो एक दूसरे से हमेशा सबंध रहा है चाहे वो चुनाव हो या घर की सुरक्षा, पुलिस हमेश नेता लोगो के साथ रहती है जिससे नेताओ का हाथ हमेश पुलिस वालो पर रहता है तो पुलिस भी उनका पूरा सहयोग देती है।

किसी भी नेता पर इल्जाम लगने पर पुलिस नेता का पूरा साथ देती है और उसे बचाने के लिए कोई न कोई जुगत लगाती रहती है। हर तरह के गैर क़ानूनी हथकंडे अपनाते है।

ऐसे कई नेता हुए जिन्होंने पर बलात्कार और अन्य कई प्रकार के आरोप लगे है मगर पुलिस ने उनको बचने के लिए या तो साबुत मिटा दिया मामले को दबाने ने लिए पीडित को डरा-धमका कर चुप करा दिया गया। जिसमे पुलिस, नेता और अन्य बड़े व्यक्तियों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार करते है।

भ्रष्टाचार में पुलिस पर कई तरह के आरोप भी साबित हुए है जैसे:- फर्जी मुठभेड़ कर निर्दोष व्यक्तियों की हत्या,  थर्ड डिग्री से जबरदस्ती  जुर्म कबुल करवाना।

कई पुलिसकर्मी मनमाने तरीके से पैसो की उगाही करते है। जैसे बिना वजह चलाना काटना है, वाहनों से गैर क़ानूनी माल को छोड़ने के लिए रिश्वत लेना, गलत कामो में फंसाने की धमकी देना, कार्यवाही करने के नाम पर पैसे मांगना और अपराधी को जानबूझकर भगाना इन सब तरीको से पुलिस में भ्रष्टाचार की भूमिका रही है।

पुलिस के इसी रवैय के कारण आज लोग संडक दुर्घटना में घायल व्यक्ति को भी नहीं बचाते है। वे सोचते है उन्हें  पुलिस बार बार परेशान करेगी और कही उनको ही ना फंसा दे इसलिए लोगो का भरोसा पुलिस पर से उठ रहा है।

आज पुलिस के होते हुए भी अपराध इतने बढ़ रहे है इसका कारण पुलिस कर्मचारियों का भ्रष्ट होना। पैसे के लालच में उनका मन पैसे लिए बिना नहीं करता है इसलिए कोई भी अपराध का शिकार व्यक्ति पुलिस के पास आता है तो उनकी कोई सुनता नहीं है।

कई बार पुलिस कर्मचारी व्यक्ति को कार्यवाही का आशवासन देकर भगा देती है। जिससे पीड़ित व्यक्ति कार्यवाही नहीं होने से आत्महत्या कर लेता है या अपराधी पुलिस के रवैये को समझ कर अपराधिक घटना को अंजाम दे देते है।

वर्तमान में पुलिस ज्यादातर अपराधियों पर कार्यवाही करने के बजाय पीड़ित व्यक्ति को परेशान करती है क्यूंकि अपराध करने वाले व्यक्ति की हिम्मत तभी होती है जब उसके पीछे किसी बड़े व्यक्ति का हाथ हो और इसलिए भ्रष्ट  पुलिसकर्मी रिश्वत लेकर अपराधी का साथ देते है।


सेना


सेना किसी भी देश की सबसे बड़ी शक्ति होती है। मगर चंद लोग पैसे के लिए देश की सुरक्षा को भी ताक पर रखकर भ्रष्टाचार करते है। देश की  गुप्त जानकारी दुश्मन देशो को भेजते है।

भारत में कई ऐसे मामले आये है जिनमे बड़े-बड़े अधिकारी देश की गुप्त सुचना पाकिस्तान को देते हुए पकडे गये है। ये सब जानकारी तभी प्राप्त होती है जब सेना में कोई भ्रष्ट या कोई देश का दुश्मन होता है।

अधिकतर भ्रष्टाचार करने वाले बड़े अधिकारी ही होते है जो अपने पद का गलत फायदा उठाते है। सेना में आने वाली राशन सामग्री में घपलेबजी करके भ्रष्टाचार करते है।

सेना में होने वाली भर्ती ही भ्रष्टाचार का कारण है। भर्ती  में लोग भाईभतीजावाद, अधिकारीयों से साठगांठ, पैसे देकर परीक्षा में पास करवाना इन सब तरीको से भ्रष्टाचार करते है। ऐसे लोग का  उदेश्य केवल केवल लाभ कमाना होता है। उनको देश की सुरक्षा से कोई मतलब नहीं है।

सेना में होने वाले भ्रष्टाचार का एक सबसे बड़ा कारण सेना की सूचनाये सुरक्षा की दृष्टि से आन्तरिक रखी जाती है इसलिए इनका सच सामने नहीं आ पाता है। इन सब गैर क़ानूनी क्रिया में सभी लोग एक दुसरे से मिले हुए रहते है इसलिए भ्रष्टाचार करने वाले लोगो पकड में नहीं आ पाते है।

सेना में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए नियमो में थोडा लचीलापन लाना होगा। जिससे भ्रष्ट लोगो का पता लगाकर उन पर देश विरोधी  कार्यवाही करते हुए कठोर दंड मिले। ताकि भ्रष्टाचार करने वालो में भय व्याप्त हो जाए और भ्रष्टाचार करने की निति को त्याग दे।


शिक्षा


शिक्षा का क्षेत्र भी भ्रष्टाचार से अछुता नहीं है। शिक्षा विकास की जननी है। इसके बिना सर्वांगीण विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। लेकिन भ्रष्टाचार ने शिक्षा क्षेत्र में भी अपनी जड़ जमा ली है।

रुपये (कैपिटेशन फीस) लेकर स्कूलों/कॉलेजों में प्रवेश देना, विद्यालयों द्वारा सामूहिक नकल कराना, प्रश्नपत्र आउट करना, पैसे लेकर पास कराना और बहुत अधिक अंक दिलाना, जाली प्रमाणपत्र और मार्कशीट बनाना आदि शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार के कुछ उदाहरण हैं।

स्कूल/कालेजों को मान्यता देने में अरबों रुपए का लेनदेन होता है; इंस्पैक्शन रिपोर्टें सही नहीं होतीं। प्राइवेट कोचिंग का बोलबाला है। स्कूलों में शिक्षक स्वयं नहीं पढ़ाने आते, शिक्षा को कमाई का अड्डा बना कर पाँच सौ-हजार रुपए देकर किसी भी ऐरे-गैरे को अपने जगह पर पढ़ाने के रख लेते है ।

नेताओं और अधिकरियों मिलकर हजारों करोड़ के नकल के धंध खोल रखे है जो परीक्षा के समय पकडे जाते है।  आज पद स्थानान्तरण के धंधे स्थापित हो गये हैं। जहा पैसे देकर अपनी मनपसंद जगह पर नियुक्ति करवा सकते है। उत्तर प्रदेश में नकल पर नकेल कसने के लिए कल्याण सिंह ने ‘नकल अध्यादेश’ लागू किया।’

ऐसे हजारों विश्वविद्यालय हैं, जहाँ प्रमाणपत्रों की बिक्री हो रही है। इनमे से अधिकांश निजी विश्वविद्यालय हैं, जिनकी बागडोर बड़े व्यवसायियों, उद्योगपतियों, और शिक्षा माफिआओं के हाथ में हैं। शिक्षा एक ‘धन्धा’ बना दिया गया है। ऐसे संस्थानों में ऊपरी चमक-दमक काफी होती है; अच्छी बिल्डिंग, अच्छे और आधुनिक व्यवस्था से पूर्ण कक्षाएं, लैब इत्यादि हैं किन्तु ऐसे संस्थानों में शिक्षा नहीं, शिक्षा का व्यवसाय होता है।

कुछ विश्वविद्यालय ऐसे भी हैं जहां कई प्रोफेसर अपने शोधार्थियों से यूजीसी से मिलने वाले स्कालरशिप में भी कमीशन लेते हैं। वह छात्रों पर दबाव डालते हैं कि या तो वह उन्हें प्रति माह एक तयशुदा राशि दें अन्यथा मिलने वाली छात्रवृत्ति पर यह कह कर रोक लगा दी।

कई विद्यालय में तो भ्रष्टाचारी बच्चो के लिए आने पोषित आहार तक को नहीं छोड़ते। विद्यालय में आने वाली अनाज की बोरियो को अपने घर ले जाते है। इस वजह से गरीब परिवार से आने वाले बच्चे भूखे रह जाते है जो बहुत ही दुःख की बात है।


चुनाव सम्बन्धी भ्रष्टाचार


बड़े बड़े नेता तो चुनाव को अपनी जगहिर समझते है। चनाव के लिए बनायीं गयी आचार सहिंता को तोड़ते है। चुनाव जीतने के लिए अपराधियों को पैसे देकर बूथ पर हमला करवाकर उसमे विघ्न उत्पन्न करते है।

लोगो को वोट देने के लिए उन्हें डरते है उन पर दबाव बनांते है। चुनाव जीतने के लिए गैर तरीके अपनाते है। वोट देने के लिए लोगो को पैसे या अन्य कीमती सामना बाँट कर अपनी साइड कर लेते है।

इनमे वे लोग ज्यादा शामिल होते है जो जिनका मकसद चुनाव जीतकर सरकारी धन लूटना होता है। चुनाव जीतने के लिए नेता द्वारा  प्रतिद्वन्दियों को अगवा करवा लेना, उनके बैनर-झण्डे नष्ट करवा देना, उन्हें डराना धमकाना जैसे कई तरीके अपनाये जाते  है।

चुनाव में वोटिंग मशीन की गणना में धांधली कर अपने प्रतिद्वन्दियों की वोटिंग को कम करकेअपने में मिला लेते है। चुनाव में जाति के हिसाब से वोट मांग कर भ्रष्टाचार करते है

वोट मांगते समय तो ऐसे-ऐसे वादे करते है जो असंभव है मगर चुनाव जीतने के बाद इनके दर्शन करना ही दुर्लभ हो जाता है। अब इनके पास वादे पूरा करने का समय नहीं रहता है। चुनाव के ये तरीके आज से नहीं काफी पहले से ही चलते आ रहे है। जिसमे भोलीभाली जनता के साथ धोखा करते है।


भ्रष्टाचार के दुष्प्रभाव


भ्रष्टाचार के होने से देश की दुर्दशा बहुत ख़राब हो गयी है, जिसने गरीब और अमीर के बीच की दूरियां और ज्यादा बढ़ा दी है इससे गरीब और गरीब और अमीर और अमीर होता जा रहा है। भ्रष्टाचार के दुष्प्रभाव निम्न है।

  • भ्रष्टाचार के कारण देश की आर्थिक विकास की गति रुक गयी है है।
  • भ्रष्टाचार के कारण से समाज में अराजकता का जन्म हुआ।
  • काले धन में वृद्धि हुई।
  • अमीर – गरीब के बीच भेदभाव को बढ़ावा मिला।
  • जातिवाद और भाषावाद के बीच व भेदभाव को बढ़ावा मिला।
  • नैतिक मूल्यों का ह्मस।
  • लोगो में बुरी आदते बढती जा रही है।

भ्रष्टाचार को दूर करने के उपाय


  • देश लोकपाल कानून लागू करने के लिए आवश्यक है।
  • देश संक्षिप्त और कारगर कानून हो।
  • देश मे प्रशासनिक मामलों में पारदर्शिता बनाए और जनता को भागीदार बनाए।
  • देश के न्यायालय मे मामला त्वरित निपटारा हो।
  • कानून और सरकार पर से लोगों की मानसिकता बदलने कि आवश्यकता है।

भ्रष्टाचार को कैसे रोकें (How To Stop Corruption)


भ्रष्टाचार हमारे भारत की सबसे बड़ी समस्या है। इसी कारण हमारा देश का विकास बहुत ही धीमा है । भ्रष्टाचार एक दिमक है जो देश को गरीब व लाचार बनाता जा रहा है।

भ्रष्टाचार पर फिल्में बनाई गई। वैसे तो भ्रष्टाचार रोकने के लिए कई बार नारेबाजी हुए मगर फिर ये धीरे धीरे शांत हो जाता है। कुछ जगह इसके खिलाफ कार्यवाही होती है रहती है मगर ये भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए नाकाफी है। भ्रष्टाचार को निम्न तरीके से समाप्त किया जा सकता है जो इस प्रकार है।


सरकारी नौकरी देने से पहले शपथ दिलाये


सरकारी नौकरी देने से पहले कर्मचारी को शपथ दिलाये की वे पूरी ईमानदारी से कार्य करेंगे कभी कोई अनुचित कार्य नहीं करेंगे। अगर वे इसमें लिप्त पाए जाते है तो उनकी सारी सम्पति जायदाद जप्त कर ली जाएगी और कठोर सजा मिलेगी।


कार्यालयों में श्रमिकों की वृद्धि


सरकारी दफ्तरों में कर्मचारी की संख्या को बढाया जाए जिससे एक ही अधिकारी पर सारा काम का बोझ ना रहे क्योंकि इससे कार्य पूरा होने में समय लगता है। जिसे जल्दी कराने के लिए जनता रिश्वत देती है। इससे भ्रष्टाचार को और अधिक बढ़ावा मिलता है।


भ्रष्टाचारी पाए जाने पर कठोर सजा और सभी सम्पति जब्त


कार्यालय में अगर कोई कर्मचारी भ्रष्टाचार करते/रिश्वत लेते हुए पाया जाता है तो तुरंत प्रभाव के साथ अधिकारी को नौकरी से बरखास्त करने के साथ कठोर दंड दिया जाए और उसकी सारी सम्पति जब्त कर ली जाए। भ्रष्टाचार को रोकने का यह एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। क्यूंकि इसमें दंड तो मिलेगा ही भ्रष्टाचारी कर्मचारी के पास अपनी कोई सम्पति नहीं रहेगी जिसका उसे भय रहेगा।


सरकारी दफ्तरों में कैमरे लगवाने चाहिए


सभी सरकारी दफ्तरों में कैमरे लगवा देने चाहिए और इसकी निगरानी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जानी चाहिए। जिससे रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने के डर से रिश्वत नहीं ली जाएगी।


भ्रष्टाचार के लिए उठाए गए कदम


भ्रष्टाचार विरोधी दिवस: दुनियाभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों में जागरूकता लाने के लिए ही 9 दिसंबर को ‘अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस’ मनाया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 31 अक्टूबर 2003 को एक प्रस्ताव पारित कर ‘अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस’ मनाए जाने की घोषणा की थी। क्योंकि भ्रष्टाचार आज किसी एक देश की नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व की समस्या है।


उपसंहार


भ्रष्टाचार एक दीमक की तरह है जो देश के विकास की गति को रोक देती है। भ्रष्टाचार इन्सान से इन्सान के बीच के सम्बन्ध को समाप्त कर देता है क्योंकि जब व्यक्ति रिश्वत लेता है तो उसकी इस आदत के कारण वो अपनों को भी नहीं छोड़ता है।

इसलिए भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए सबसे पहले हमे अपनी आदत सुधारनी होगी क्योंकि इसकी शुरुआत हमारे द्वारा ही होती है। भ्रष्टाचार हमारे देश के लिए एक बड़ा खतरा है इसे समाप्त करने के लिए हम सभी को जागरूक होना ताकि इसे जड़ से उखड फेंके।

तो दोस्तों ये था भ्रष्टाचार पर निबंध (Corruption Essay In Hindi) उम्मीद करता हूँ आपको जरुर पसंद आया होगा अगर पसंद आये तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे

धन्यवाद

जय हिंदी जय भारत

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