शिक्षा पर हिंदी में निबंध (Essay On Importance Of Education In Hindi)

10 lines on education in hindi

नमस्ते दोस्तों आज हम शिक्षा पर निबंध हिंदी में ( Essay On Importance of Education In Hindi) लिखेंगे दोस्तों यह शिक्षा के महत्त्व पर निबंध (Kids) class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12  और College के विद्यार्थियों के लिए लिखे गए है।

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शिक्षा पर निबंध (Essay On Education In Hindi)


प्रस्तावना


शिक्षा व्यक्ति के जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है। शिक्षा एक अमूल्य धन है, जो जितना खर्च करेंगे उतना ही बढ़ेगा और जितना अपने पास रखोगे उतना ही घटेगा। ये शिक्षा की विशेषता है।

शिक्षा से व्यक्ति सभ्य नागरिक बनता है। शिक्षा मिलने से उसे किसी बात को समझने और समझाने की ताकत मिलती है। जिससे वो जीवन में आने वाली समस्याओ को सुलझा कर सफलता की और बढे हुए किसी भी तरह का परिवर्तन ला सकता है।

शिक्षा प्राप्त करना सभी के लिए जरुरी है और उसका हक़ भी है। शिक्षित से सही और गलत की पहचान होने से व्यक्ति समाज में मौजूद कुप्रथाओ को समाप्त कर सकता है।

शिक्षा केवल वही नहीं होती जो हमे विद्यालय से नहीं मिलती है बल्कि ये हमे अगर किसी जानवर या प्रकृति के रूप में भी मिलती है तो वो भी शिक्षा ही होती है और उसका भी उतना ही महत्त्व होता है।

पहली शिक्षा की शुरुआत माता -पिता से होती है इसके बाद वे उसे विद्यालय में शिक्षित करते है। क्योंकि माता -पिता जानते है कि बच्चे को शिक्षित करने पर ही एक सभ्य समाज का निर्माण संभव है। जिससे देश और समाज को बदला जा सकता है।


शिक्षा शब्द की उत्पत्ति


शिक्षा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘ शिक्ष ‘  धातु से हुई है जिसका अर्थ होता है सीखना या सिखाना । ये लैटिन भाषा के एडुकेयर और एडुसीयर से हुई  है इसे अंग्रेजी में एजुकेशन कहते है।


शिक्षा की परिभाषा 


  • महात्मा गांधी:- गाँधी जी के अनुसार शिक्षा से तात्पर्य मनुष्य के शरीर, मन तथा आत्मा के सर्वांगीण एवं सर्वोत्कृष्ट विकास से है
  • रविन्द्र नाथ टैगोर:- टैगोर के शब्दों में, “सर्वोत्तम शिक्षा वह है जो हमारे जीवन का समस्त सृष्टि से सामंजस्य स्थापित करती है।”

शिक्षा का उद्देश्य है


आज 90 प्रतिशत लोगो केवल उच्च शिक्षा को प्राथमिकता इसलिए देते है मतलब जितनी ज्यादा पढाई करेगें उतनी अच्छी पैसे की नौकरी मिलेगी

मगर ऐसा जरुरी नहीं मेरे अनुसार ये शिक्षा का उद्देश्य नहीं है शिक्षा का उद्देश है मानव सेवा होना चाहिए और पैसे तो आपकी मेहनत और लगन के अनुसार मिल जाते है।


बचपन की आरंभिक शिक्षा


बच्चों के बचपन की पहली पाठशाला घर और शिक्षा माँ होती है। माता -पिता बच्चे के जन्म लेते ही उसे अच्छी आदते, अनुशासन और कार्य करने का सही तरीका सिखाते है।

बच्चो में संस्कार और नैतिकता गुणों का विकास किया जाता है। बच्चो को जन्म से बड़ो के पैर छूना, भगवान के सामने हाथ जोड़ना, बड़ों का  सम्मान और शिष्टाचार सिखाया जाता है।

ये सभी शिक्षा और संस्कार ही होते है, जिनके बाद ही बच्चा सही मायनो में स्कूल के शिक्षा ग्रहण करने योग्य होता है क्योंकि जो शुरुआती शिक्षा माँ देती है, वो विद्यालय में बहुत कम बताई जाती है और माँ के द्वारा दी गयी सर्वोतम शिक्षा बाद में मिले सभी ज्ञान का स्तम्भ और आधार होता है।


विभिन्न शिक्षा अनुसार नौकरी


किसी भी व्यक्ति को उच्च शिक्षा लेने के लिए पहले निम्न स्तर से ही शुरुआत करनी होती है। जिससे वो शिक्षा के बड़े स्तर को समझ सके इसके लिए सबसे पहले निजी या सरकारी स्कूल से कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 तक शिक्षा लेनी होती है। इसके बाद ही आप उच्च शिक्षा के योग्य हो पाते है।

विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद अन्य निजी और सरकारी शिक्षा संस्थान, जैसे कॉलेज और विश्वविद्यालय में जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करते है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थी को स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय से डिग्री मिलती है। इस डिग्री के आधार पर व्यक्ति अपनी रूचि के अनुसार नौकरी की तलाश करता है।

उच्च शिक्षा महँगी होती है और इसके लिए कई सालो तक पढाई करनी होती है। तब जाकर व्यक्ति को डॉक्टर, वकील, शिक्षक, कृषि पर्यवेषक और अन्य पदों की  डिग्री डिग्री मिलती है, जो व्यक्ति पैसे के लिए डॉक्टर, वकील, शिक्षक की पढाई नहीं बल्कि समाज की सेवा करने के लिए कुछ बन रहे है। केवल ऐसी सोचा वाले व्यक्ति ही सफल हो पाते है।

शिक्षा का क्षेत्र बहुत बड़ा आपकी उम्र भी खत्म हो जाएँ तो भी शिक्षा पूरी नहीं होती है। हर क्षेत्र में कार्य करने के लिए शिक्षा प्राप्त करनी होती है क्योंकि जहा समझना, सीखना, जानना और करना होगा वहा शिक्षा लेना आवश्यक है।

शिक्षा की शुरुआत बच्चे के बोलने और खड़े होने से ही शुरू हो जाती  है तो आप सोच सकते है कि अभी तक अपने जो किया है उसके लिए आप पहले शिक्षा के क्षेत्र से ही गुजरे है।


शिक्षा आर्थिक आवश्यकता


शिक्षा लेने के बाद व्यक्ति अपनी रूचि के अनुसार नौकरी या स्वय का व्यापार शुरू कर सकता है। शिक्षा के दम पर नोकरी या अपने व्यापार से प्राप्त धन का उपयोग अपने परिवार के दैनिक खर्चो में कर सकता है।

प्रत्येक व्यक्ति को कभी न कभी पैसे कमाने के लिए काम करना ही पड़ता है। इसके लिए उसको आत्मनिर्भर बनना जरुरी है क्योंकि बिना मेहनत ना पैसा मिलाता है और ना समाज में सम्मान और इज्जत मिलती है।

शिक्षा का अर्थ मानव सेवा है मगर बिना धन के जीवन चलाना संभव नहीं है इसलिए अपनी रूचि के अनुसार ली हुई शिक्षा से मानव सेवा में काम करते हुए लाभ कमाना होना चाहिए। अगर शिक्षा का उपयोग मानव सेवा नहीं करते है बल्कि उसका उपयोग निजी लाभ और गलत कार्य में करते है तो वो शिक्षा किसी भी काम की नहीं होती है।


जीवन में शिक्षा का महत्त्व


जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए शिक्षित होना जरुरी होती है। शिक्षा से व्यक्ति गलत सही कार्य और सही सोच का आंकलन कर सकता है जो उसके दृष्टिकोण को बदलती है। उसे किसी  पर निर्भर रहने के आवश्यकता नहीं है।

शिक्षा से मनुष्य का ज्ञान बढ़ता है और उसके दिमाग की तर्कशक्ति का विकास होता है और यही शिक्षा उसे हमेशा सकारात्मक बनती है जो उसे हर विपरीत परिस्थितियों में समस्या से बाहर निकालने का रास्ता दिखाती है।

किसी भी देश के विकास की गति वहा की शिक्षा पर निर्भर करती है क्योंकि जिसके पास जितनी अच्छी शिक्षा होगी वो उस शिक्षा का उपयोग स्वयं और देश के हित के लिए कर सकता है।

बिना शिक्षा के व्यक्ति का दिमाग खाली होता है जो कुछ नहीं सोच सकता है जो ना सफल हो सकता है ना देश और समाज की सेवा कर सकता है इसलिए अशिक्षित व्यक्ति जानवर के समान माना जाता है।

शिक्षा के तीन प्रकार 

  • औपचारिक शिक्षा
  • अनौपचारिक शिक्षा
  • निरौपचारिक शिक्षा

औपचारिक शिक्षा



अनौपचारिक शिक्षा


अनौपचारिक शिक्षा की कोई योजना नहीं बनाई जाती है। इसका कोई लक्ष्य नहीं होता है। इसमें पढ़ने के तरीका और समय निश्चित नहीं होता है।

अनौपचारिक शिक्षा में व्यक्ति जीवन में आने वाली सभी परिस्थतियो से सीखता है जो हम साधाराण दुनियादारी से सीखते है। ये शिक्षा मनुष्य जीवन भर कही न कही सीखता ही रहता है जो हमे हर समय  कही न कही सिखने को मिलती रहती है।


निरौपचारिक शिक्षा


निरौपचारिक शिक्षा की निश्चित सीमा नहीं होती मगर इसके उद्देश्य व पाठ्यचर्या निश्चित होते है मगर इनकी योजना बहुत लचीली होती है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को जीवनपूर्ति आवश्यक सामान्य शिक्षा प्रदान करना होता है।

निरौपचारिक शिक्षा में  प्रौढ़ शिक्षा, सतत् शिक्षा, खुली शिक्षा और दूरस्थ शिक्षा, ये सब निरौपचारिक शिक्षा अंतर्गत आते है। इसकी योजना व्यक्ति की रूचि की शिक्षा के अनुसार निश्चित की जाती है।

ये शिक्षा उन व्यक्तियों बच्चों को मिलती है जो किसी न किसी कारण से शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाए या तो जिनकी पढने की इच्छा बाद में हुई या शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक रूप से असमर्थ थे इसमें।   


निष्कर्ष


व्यक्ति का शिक्षित होना बहुत जरुरी है क्योंकि आप चाहे कितनी भी छोटी से छोटी गतिविधियाँ करें। सभी में शिक्षा अपना महत्त्व निभाती है।

पहले के समय और आज के आधुनिक समय की बात करें तो आज जिंतनी सुविधाएँ आपको मिल रही है वो सब मनुष्य का जहीन दिमाग भी शिक्षा की उपज है। जिसके कारण उसने असंभव को भी संभव कर दिखाया है।

शिक्षा से आज लोग आत्मनिर्भर बनकर सिर उठाकर सम्मान के साथ समाज में अच्छा जीवन जी रहे है। आज अधिकतर लोग शिक्षा के महत्त्व को समझते हुए शिक्षा ग्रहण कर रहे है।  शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती है, आप जब चाहे शिक्षा लेना शुरू कर सकते है।

आज अधिकतर लोग जो शिक्षित है वे सब अपना अहम् योगदान देश की प्रगति और समृधि में दे रहे है और जब सभी लोग शिक्षित होंगे तो हर जगह खुशहाली और सम्पन्नता होगी।

तो दोस्तों ये था शिक्षा पर हिंदी में निबंध शिक्षा पर निबंध हिंदी में (Essay On Importance of Education In Hindi) उम्मीद करता हूँ आपको ये निबंध जरुर पसंद आया होगा अगर पसंद आये तो हमे कमेंट करके जरुर बताये 

धन्यवाद 

जय हिंदी भारत