पर्यावरण पर निबंध हिंदी में (Environment Essay In Hindi)

पर्यावरण पर निबंध हिंदी में (Environment Essay In Hindi)

 

नमस्ते दोस्तों आज हम पर्यावरण पर हिंदी में निबंध (Essay On Environment In Hindi) लिखेंगे दोस्तों यह वैश्विक तापमान पर निबंध (Kids) class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12  और College के विद्यार्थियों के लिए लिखे गए है।

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पर्यावरण पर निबंध (Environment Essay In Hindi) 


प्रस्तावना


पर्यावरण का निर्माण सभी जीव जन्तुओ जैविक अजैविक, जल, वायु, अग्नि और अन्य कई चीजो से मिलकर बना होता है अगर ये पर्यावरण के साथ-साथ चलते है तो पर्यावरण का संतुलन बना रहता है यदि इनमे से किसी में भी संतुलन बिगड़ता है तो पर्यावरण भी अपना निर्धारित संतुलन खो देता है

मनुष्य अपने बुद्धि और ताकत से नए नए अविष्कार करके अपने जीवन को सुख सुविधाओ से भरपूर बना रहा है मगर इस सुख सुविधाओ की और अपने कदम बढ़ाते हुए वो प्रकृति के बारे में सोचना भूल गया है की जिस सुख सुविधाओं का वो निर्माण कर रहा है उसका प्रकृति पर क्या बुरा असर पड़ेगा। इसी कारण मनुष्य ने कई हानिकारक प्रतिरूपों को जन्म दे दिया है।   

मनुष्य ने विज्ञानं के द्वारा प्रकृति के सभी संसाधनों का आवश्यकता से ज्यादा उपयोग कर प्रकृति का शोषण करना शुरू कर दिया है और उसकी पूर्ति के लिए गैर जिम्मेदार हो गया है

मनुष्य के स्वार्थ पूर्ण दोहन द्वार किये गये विकास की वजह से आज वैश्विक तापमान और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही है जो इस विकास को आने वाले भविष्य में एक विध्वंस आपदा की और ले जा रही है


पर्यावरण दिवस (Environment Day)


5 जून 1974 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। जिसके बाद समस्त दुनिया में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। मनुष्य द्वारा स्वार्थपूर्ण दोहन करने से पर्यावरण खतरे में पड़ गया है। जिसके प्रति जागरूकता लाने के लिए पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।


सामान्य भाषा में  पर्यावरण का अर्थ 


पर्यावरण में जैविक और अजैविक तत्व सयुंक्त रूप से मिलकर कार्य करते है अजैविक तत्व हमारे चारो तरह होते है और हम हर  समय इनसे धीरे हुए रहते है जैसे: मृदा, जल, वायु, प्रकाश आदि 

जैवमंडल पृथ्वी, जल और वायु से मिलकर बना है जल और वायु ये पृथ्वी को चारो तरफ से घेरे हुए है, इसमें मौजूद छोटे छोटे सूक्ष्म जीव सयुंक्त रुप से कार्य करते रहते है जैवमण्डल के तीन घटक है, स्थल मंडल, जल मंडल ओर वायु मंडल।


पर्यावरण की परिभाषा (Definition of Environment)


पर्यावरण शब्द की उत्तपति फ्रांसीसी शब्द” एनिट्स” से हुई है। पर्यावरण शब्द का निर्माण दो शब्दों परी ओर आवरण से मिलकर बना है। जिसमे परी का मतलब है हमारे आसपास अर्थात जो हमारे चारों ओर है और आवरण जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। 

अगर साधारण परिभाषा में बोलते तो हमारे चारो तरफ पाए जाने वाले आवरण जैसे: पेड़ पौधे, जीव जंतु, जल, वायु, नदी, नाले, और पहाड़ को पर्यावरण कहते है


पर्यावरण का महत्व (Importance of Environment)


जीवन चक्र को चलाने में पर्यावरण का होने आवश्यक है पर्यावरण प्रकृति में पाए जाने वाले तत्व जैसे: जल, वायु, अग्नि, पेड़-पौधे, वनस्पति, जीव-जंतु, पशु पक्षी, सूक्ष्म जीव ये सभी पर्यावरण में अपनी भूमिका सामान रूप से निभाते है

पर्यवरण में इन सभी कारको से संतुलन बना रहता है और अगर इनमे से किसी एक को नुकसान पहुँचता है तो इसका असर पूरे पर्यावरण पर पड़ता है, जिससे विकार उत्पन्न होता है इसका असर जीव-जंतु और पेड़ पौधो की कार्यप्रणाली पर पड़ता है इसलिए इनका संतुलन होना आवश्बयक है

मनुष्य की सुख-सुविधा के लिए पर्यावरण ने सभी संसाधनों की व्यवस्था की हुई है जिसका उपयोग करके हम अपने जीवन को सुखमय बना सकते है

प्राकृतिक रूप से होने वाले नुकसान और आपदा को पर्यावरण स्वत: ही ठीक करने की क्षमता रखता है जिससे पर्यावरण का संतुलन बना रहे रहता है  आज पर्यावरण में इतना प्रदूषण हो चूका मगर फिर भी लगभग संतुलन कायम है ये सब पर्यावरण के कारण ही संभव है

मानव और जीव-जन्तु आक्सीजन लेकर कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते है और पेड़ पौधे कार्बन डाइऑक्साइड लेकर आक्सीजन छोड़ते है जो मनुष्य के लिए जरुरी है यही तो पर्यवरण और उसकी कार्य प्रणाली है जिससे जीवन चक्र चल रहा है

आज  विज्ञान की तकनीकी से  प्रौद्योगिकी को बढ़ावा मिला है जिससे इन्सान अपनी सुविधाओं, सुरक्षा के लिए नए नए अविष्कार कर रहा है मगर एक दुसरे की प्रतिस्पर्धा की दौड़ में इतना अँधा हो गया है की मनुष्य प्रकृति के संसाधनों का स्वार्थपूर्ण तरीको से दोहन करने लगा है

जिससे पर्यावरण में असंतुलनआ गया है और इससे कई प्रकार की गंभीर समस्याएँ पैदा हो गयी है जैसे: वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, चक्रवात, जंगला में आग लगना, भूस्खलन आदि

मनुष्य अपनी सुख सुविधा के लिए जो अविष्कार कर रहा है, उनसे ऐसे हानिकारक तत्वों उत्पन्न हो रहे है जो पर्यावरण में मौजूद कारको को बुरी तरह प्रभावित और प्रदूषित कर रहे है। इसी कारण इसका असर पूरे जैवमंडल  पड़ रहा है

अत: हम कह सकते है की पर्यावरण का हमारे जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है या फिर यो कहे की जीवित रहने के लिए पर्यावरण का स्वच्छ और स्वथ्य रहा बेहद आवश्यक है


पर्यावरण और जीवन (Environment And Life)


पर्यावरण और मनुष्य एक-दूसरे के पूरक हैं, मगर मनुष्य प्रकृति पर पूरी तरह से निर्भर है क्योंकि मनुष्य किसी भी चीज का निर्माण  पर्यावरण द्वारा उपलब्ध संसाधनों की सहयता से ही कर सकता है

पर्यावरण के कारण हमे जीवन जीवन के लिए आवश्यक तमाम  सुविधाएँ प्रकृति ने हम दी है पर्यावरण के बिना हम क्षण मात्र की काल्पन भी नहीं कर सकते है मगर मनुष्य द्वारा बनाये गये साधन मनुष्य के लिए फादेमंद है मगर ज्यादातर प्रकृति के अनुसार  अनुकूल नहीं है

जबकि प्रकृति द्वारा दिए गये सभी संसाधन मनुष्य और पर्यावरण दोनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और अनुकूल है इसलिए पर्यावरण का स्वच्छ होना बहुत जरुरी है

मनुष्य को प्रकृति के साधनों का निर्धारित और प्रकृति के नियम के अनुसार ही दोहन करना चाहिए । हमारा पर्वायावरण वायु, जल, अग्नि, आकाश और थल इन पांच तत्व से बना हैं, जो  जीवन का निर्माण करते है

पर्यावरण ने नुकसान पहुँचाने वाले प्रत्येक करके से सुरक्षा प्रदान की हुई है उदहारण के लिए ओजन परत है जो सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से हमे बचाती।

मनुष्य ने आज प्रक्रति को बुरी तरह प्रदूषित कर दिया है पर्यावरण में  मोजुदा जीवन चक्र पूरी तरह असंतुलती है फिर भी पर्यावरण उसमे सामंजस बैठाते हुए प्रकृति स्वंय को संतुलित करने की कोशश कर रही है। जिस प्रकार एक माँ दुःख उठाते हुए भी अपनी संतान को दुखो से बचाती है।

पर्यावरण का संतुलन होना बेहद आवश्यक है। इसके लिए हमे प्रकृति को नुकसान पहुँचाने वाले तत्वों पर रोक लगानी होगी और अधिक से अधिक पेड़ लगाकर प्रदूषण को कम करना होगा। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति का जागरूक होना आवश्यक है। तभी ये पर्यावरण फिर से पहले की भांति स्वच्छ हो जायेगा।


पर्यावरण संरक्षण के उपाय (Paryavaran Sanrakshan Ke Upay)


  • उद्योगों से निकलने वाला दूषित पदार्थ और धुएं का सही तरीके से निस्तारण करना चाहिए।
  • पर्यावरण की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
  • ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाना चाहिए।
  • पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगानी चाहिए।
  • वाहनों का इस्तेमाल बेहद जरूरत के समय ही किया जाना चाहिए।
  • दूषित और जहरीले पदार्थों के निपटान के लिए सख्त कानून बनाए जाने चाहिए।
  • लोगों को पर्यावरण के महत्व को समझाने के लिए जागरूकता फैलानी चाहिए

उपसंहार


पर्यावरण हमारे जीवन से बढ़कर है और बिना सुख सुविधाओं से भी हम अच्छा जीवन जी सकते है मगर बिना पर्यावरण हम भविष्य के काल्पन भी नहीं कर सकते है।

पर्यावरण बचने के लिए हमे अपनी आदतों को सुधारना चाहिए और पर्यावरण और  उसको नुकसान पहुचाने वाली प्रत्येक  कार्यप्रणाली को  पर रोक लगनी चाहिए चाहे वो कितनी भी अधिक जरुरी हो मगर हमारे जीवन और पृथ्वी से अधिक जरुरी नहीं है।

पर्यावरण  को जीवनदान अधिक से अधिक पेड़ लगाकर दिया जा सकता है। अगर हम सब मिलकर एक साल में एक पेड़ भी लगायें तो पूरा पर्यावरण  फिर से पहले की भांति साफ़ हो जायेगा।


पर्यावरण के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर 


1. पर्यावरण किसे कहते है ?

उत्तर:- हमारे चारो और पाए जाने वाले आवरण को पर्यावरण कहते है जैसे: नदी, वायु, पेड़ पौधे, जीव-जंतु आदि

2.   जैव मंडल के कितने घटक है

उत्तर: जैवमण्डल के तीन घटक है, स्थल मंडल, जल मंडल ओर वायु मंडल।

3.  पर्यावरण दिवस कब मनाया जाता है

उत्तर: 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।

तो दोस्तों ये था पर्यावरण पर निबंध में उम्मीद उम्मीद करता हूँ पर्यावरण पर निबंध (Essay On Environment) जरुर पसंद आया होगा पसंद आये तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे

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