वायु प्रदूषण पर निबंध हिंदी में (Essay On Air Pollution In Hindi )

वायु प्रदूषण पर निबंध हिंदी में (Essay On Air Pollution In Hindi )

नमस्ते दोस्तों आज हम वायु प्रदूषण एक समस्या पर हिंदी में निबंध (Air Pollution Essay In Hindi) लिखेंगे दोस्तों यह जल संरक्षण पर निबंध (Kids) class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12  और College के विद्यार्थियों के लिए लिखे गए है।

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वायु प्रदूषण पर हिंदी में निबंध (Air Pollution Essay In Hindi)


प्रस्तवना


वायु प्रदूषण आज सभी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। वायु प्राणियो के जीवन का आधार हम बिना पानी कुछ समय रह सकते है मगर बिना वायु तो क्षणमात्र की कल्पना भी नहीं कर सकते है।

काफी सालो पहले की बात की जाए तो सुविधाए नामात्र की थी और उनका उपयोग भी हम संतुष्टि से कर लेते है मगर इन कुछ सालो में आधुनिकता और तकनिकी ने इतना विकास किये है की फायदे के साथ इसके दुष्प्रभाव होने लगे है।

हर रोज नये कारखाने और यातायात के साधनों में बढ़ोतरी हो रही है जो वायु प्रदूषण का कारण है। इसी वजह से प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है। पृथ्वी पर मौजूद ओजोन परत भी नष्ट हो रही है, जिसका कारण मनुष्य का स्वार्थपूर्ण तरीके से संसाधनों का दोहन करना है।

प्रदूषण से हर साल लाखो लोगो की जान चली जाती है। शहर के साथ गाँव की शुद्ध वायु भी प्रदूषित हो गयी है। मनुष्य के लिए स्वस्थ वायु बहुत जरुरी है क्योंकि अगर वायु की संरचना या उसमे असंतुलन हो जाये तो फिर ये पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है।

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वायु प्रदूषण की परिभाषा (Definition of Air Pollution)


जब वायु में हानिकारक विषैली गैसों और धुल के कण मिल जाने पर ये मनुष्य और जीव जन्तुओ के स्वथ्य के लिए हनिकारक होती है तो इसे ही वायु प्रदूषण कहते है दुसरे शब्दों में बोले तो वायु का दूषित होना वायु प्रदूषण कहलाता है


वायु प्रदूषण के कारण (Due To Air Pollution)


वायु प्रदूषण के कारण भिन्न-भिन्न होते है वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण यातायात के साधन है एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में वाहनों की कुल 1,52,71,519 करोड़ है जो संख्या बहुत बड़ी संख्या है भारत को विश्व में सातवें सबसे अधिक पर्यावरण की दृष्टि से खतरनाक देश के रूप में स्थान दिया गया है।

गाड़ी के धुए में कार्बन मोनो ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन नाइट्रोजन के ऑक्साइड सल्फरडाय ऑक्साइड और डीजल वाहनों से नाइट्रोजन के ऑक्साइड धुआं सूक्ष्म कण एल्डीहाइड और गंधक का उत्सर्जन होता है।

ट्रेन और हवाई जहाज एक ही बार में सबसे ज्यादा धुआं उत्पन्न करते है जिसमे हवाई जहाज का धुआं तो असमान में ही रह जाता है और वो वायुमंडल में पहुँच कर प्रदूषण फैलाता है

विश्व में हर रोज हजारो की संख्या में कारखानों और ओद्योगिक इकाइयों का निर्माण हो रहा है इनकी स्थपना के लिए लाखो पेड़ काटे जाते है और फिर ये कारखाने स्वयं दिन रात प्रदूषण फैलाते है

जैसे जैसे जनसँख्या बढ़ रही है, भूमि की उपलब्धता कम होने से रहने के लिए पेड़ काटे जा रहे है जिससे जंगल छोटे हो रहे है पेड़ की संख्या कम होने से आक्सीजन की मात्रा कम हो रही है और वायु में कार्बन डाइऑक्साइड गैसे बढ़ रही है

आज भी अधिकतर लोग घर पर खाना बनाने के लिए लकड़ी और कोयले का उपयोग करते है,  जिससे काफी मात्रा में धुआं  निकलता है जो पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है

सड़क साफ़ करने वाले कर्मचारी के द्वारा भी प्रदूषण फैलता है, उनके द्वारा जलाये गए कूड़े के ढेर मे प्लास्टिक और कई हानिकारक वस्तुएं होती है जो गैसे और धुआं फैलाते है

आपने देखा होगा सफाई कर्मचारी झाड़ू करते समय काफी मात्रा में धुला उड़ाते है, जिसके कण वायु में मिल जाते है और यही धुल के कण हमारे मुंह और नाक के द्वारा शरीर में प्रवेश करते हैजिनसे कई रोग उत्पन्न हो जाते है

दिवाली त्यौहार पर एक साथ आतिशबाजी करने पर काफी मात्रा में जहरीला धुआं निकलता है जो हवा में जहर घोल घोलने का काम करता है

कुछ साल पहले दिल्ली में पटाखे छोड़ने से क्या हालात उत्पन्न हुए थे ये आप सभी जानते है पूरी  दिल्ली में धुंध के साथ मिलकर स्मोग बन गया था जिसमे साँस लेने और आखों में जलन की शिकायत हुई थी और इसी स्मोग से कई दुर्घटनाये भी हुई

खेतो में जलने वाली पराली से निकलने वाला धुआ कई किलोमीटर तक फ़ैल जाता है, जो धीरे-धीरे अन्य शहरो तक पहुँच जाता है और वायु को प्रदूषित कर देता है

वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण कपड़ा बनाने के कारखाने, रासायनिक कारखाने, तेल शोधक कारखाने, चीनी बनाने के कारखाने, धातुकर्म और गत्ता बनाने वाले कारखाने, खाद और कीटनाशक कारखाने और अन्य कई छोटे मोटे दहन के कारखाने है

इन सभी कारखानों से निकलने वाले कार्बन-डाई-आक्साइड, नाईट्रोजन, कार्बन-मोनो-आक्साइड, सल्फर, सीसा, बेरेलियम, जिंक, कैडमियम, पारा और धूल सीधे वायुमंडल में पहुंचते हैं वायु के प्रदूषण को बढ़ाते है

वायु में प्रदूषण निर्धारित मात्र से अधिक होने से अम्लीय वर्षा होने का खतरा बढ़ जाता है क्योकि अम्लीय वर्षा से इमारत को क्षति पहुँचती है पेड़-पौधे नष्ट हो जाते है फसल ख़राब हो जाती है इसलिए वायु का शुद्ध होना जरुरी है

सार्वजानिक स्थानों पर शौचालयों की सफाई नहीं होने से उनमे दुर्गन्ध उत्पन्न होती है जो वायु में मिलकर उसे प्रदूषित करती है मरे हुए जानवरों उनकी खालो के के सड़ने से भी वायु प्रदूषित होती है

शोध कार्य के लिए रासायनिक प्रयोगों के परीक्षण द्वारा वायु प्रदूषण फैलता है हमारे देश में कई विस्फोटक हथियारों का परिक्षण किया जाता है जिनसे कई खतरनाक तरंगे और गैसे उत्पन्न होती है जो वायु को नुकसानदयाक बनाती है

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वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव (Side Effects of Air Pollution)


किस भी प्राणी के लिए स्वस्थ होना जरुरी है क्योंकि वायु का सीधा सम्बन्ध हमारी श्वसन प्रणाली से होता है अगर हमे स्वस्थ वायु नहीं मिले तो ये धीरे धीरे कई रोगों को जन्म देती है

प्रदूषित वायु में कई प्रकार के हानिकारक कण और गैसे होती है जो हमारे फेफड़ो में जम जाती है और रोग उत्पन्न करती है गाँव में अभी वो हालात नहीं है जो शहर में है अगर इस पर ध्यान नहीं है दिया गया तो धीर धीरे गाँव में भी शहरो का प्रदूषण पहुँच जाएगा

प्रदूषित वायु से होने वाली बीमारियाँ बड़ा रूप धारण कर लेती है जो इन्सान के लिए जानलेवा हो सकती है प्रदूषण पर्यवरण के पारिस्थितिक तंत्र को लगातार नष्ट कर रहा है जिसका प्रभाव जीवजन्तु से लेकर पेड़ पौधो पर भी पड़ रहा है

वायु में उपस्थित सल्फर-डाई-आक्साइड के कारण दमा जैसे रोग हो जाते है। जब सल्फर-डाई-आक्साइड बूंदों के रूप में वर्षा के साथ भूमि पर गिरती है तो इस अम्लीय वर्षा से भूमि अम्लीय हो जाती है जिससे अच्छी खासी फसल भी नष्ट हो जाती है और भूमि की उर्वरकता क्षमता घाट जाती है जो धीरे धीरे भूमि को बंजर कर देती है

वायु प्रदूषित होने से पृथ्वी पर स्थित ओजन परत में भी गड्ढे पड़ गए गये है जो हमे सूर्य से आने वाली पराबैगनी किरणों को रोककर उनसे होने वाले नुकसान से बचाती है

अगर ओजोन पर नहीं होगी तो  पराबैगनी  किरणे पृथ्वी पर पहुँच जायेगी जो बहुत नुकसानदायक है प्रदूषण फ़ैलाने में चीन पहले पायेदान पर है उसके बाद भारत का दूसरा स्थान है इससे अंदाजा लगा सकते है की हम कितनी भयावह स्थति में है

जब वायु में प्रदूषण से अन्य गैसों की मात्र बढ़ जायेगी तो आक्सीजन कम हो जायेगी, जिससे सांस लेने में भी कठनाई होगी वायु प्रदूषण से  मनुष्य में श्वसन, दमा, ब्रोंकाइटिस, सिरदर्द, फेफड़े का कैंसर, खांसी, आँखों में जलन, गले में दर्द, निमोनिया, ह्रदय रोग, उल्टी, जुकाम जैसे रोगों उत्पन्न होने लगते है।

सल्फर-डाई-आक्साइड से एम्फायसीमा नामक रोग होने का खतरा होता है। वायु प्रदूषण सबसे ज्यादा जीव-जंतुओं के श्वसन तंत्र और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र प्रभावित करता है।

वायु प्रदूषण एक चिंता का विषय है। इसका समाधान करना आवश्यक है, अन्यथा ये पूरी पृथ्वी के लिए बहुत एक बहुत बड़ी समस्या कड़ी कर देगा जिसका एकमात्र उपाय पेड़ है ।

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वायु प्रदूषण कम करने के उपाय (Ways To Reduce Air Pollution)


हम रोजाना लकड़ी और कोयले का उपयोग करते है जो अधिक धुआं देते है हमे इसे कम करना होगा। इसकी जगह गैस का प्रयोग करें जिसमे प्रदूषण ना के बराबर होता है।

सफाई कर्मचारी झाड़ू से सफाई करते है समय अधिक धुल ना उड़ायें और एकत्रित कचरें में से प्लास्टिक और अन्य हानिकारक वस्तुओं को अलग करके ही जलाएं।

सबसे पहले सरकार अधिक प्रदूषण फ़ैलाने वाली ओद्योगिक इकाईयों पर कानून सख्त करे और दंड का प्रावधान रखे ओद्योगिक इकाईयों को धुंए कम करने और कम नुकसानदायक बनाने वाली तकनिकी का उपयोग करें।

शहर के पास में और इनके बीचो-बीच चल रहे कारखानों को शहर से दूर स्थापित करें और अवैध रूप से स्थापित कारखानों पर कार्यवाही कर उन्हें बंद करें।

अगर आप और आपका दोस्तों रोजाना ऑफिस जाते है तो एक ही गाड़ी का उपयोग करें। इससे पैसे, और पैट्रोल दोनों की बचत होगी। अगर ऑफिस ज्यादा दूर नहीं है तो साइकिल का उपयोग करें।

गाड़ी से उतरने के बाद इंजन को पूरा बंद करें उसे चालू नहीं छोड़े, ऐसी आदते लोगो में देखने को मिलती है की वे गाड़ी को चालू छोड़कर सामान लेने चले जाते है जिससे वायु प्रदूषण बिना वजह होता है।

सरकार द्वारा उपलब्ध यातायात के साधनों का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें। बहुत जरुरी हो तभी वाहन का उपयोग करें। छोटे मोटे काम के लिए वाहन नहीं चलाये पास के कार्य को पैदल जाकर ही करें।

अपने वाहन की समय समय पर सर्विस करवाए ताकि ज्यादा धुआं नहीं फैलाये जो आपको चालान से होने वाले आर्थिक नुकसान से भी बचाएगा। आजकल प्रदूषण जांच करने वाली सुविधा हर सड़क उपलब्ध है।

सरकार को सी.एन.जी, सौर उर्जा, बैटरी से चलने वाले वाहनों के निर्माण पर जोर देना चाहिए साथ ही प्रदूषण फ़ैलाने वाले व्यक्ति पर क़ानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।

जंगलो में हो रही अवैध और अंधाधुंध कटाई को रोकना होगा अगर किसी को निर्देश मिले है पेड़ कटाई के तो उसे उतने ही पेड़ लगाये भी ताकि पेड़ो की कमी ना हो।

सरकार को अपने सभी सरकारी कर्मचारी से एक निश्चित समय पर पेड़ लगवाने के नियम बनाने चाहिए। पेड़ लगाने के लिए पुरे देश में पेड़ लगाने के कार्यक्रम चलने चाहिए और सभी को पेड़ो के महत्त्व के बारे में बताना चाहिए।

हम सभी को हर महीने या एक साल में एक पेड तो जरुर लगाना चाहिए। अगर एक व्यक्ति एक पेड़ भी लगाएगा तो एक साल में अरबो पेड़ लग सकते है बस्शर्त ये की व्यक्ति इसे पूरी ईमानदारी से निभाए।

अगर हम इन सभी बातो का ध्यान दे तो वो दिन दूर नहीं जब पहले की तरह हर जगह हरियाली और शुद्ध वायु और हर जगह फल-फुल देखने को मिलेगे और सभी लोग स्वस्थ और सुखी होंगे।


उपसंहार


वायु प्रदूषण हमारी नहीं पुरे विश्व की समस्या है, जिस पर हम सभी को ध्यान देना होगा। वायु प्रदूषण ऐसी छोटी समस्या नहीं है जिसे अगर अनदेखा करने पर नुकसान नहीं होगा बल्कि ये हमरे जीवत रहने का एक मात्र सहारा है।

आधुनिक तकनीकी और स्वार्थपूर्ण तरीके से प्राकृतिक संसाधनों के प्रयोग से वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है जो आगे आने वाले समय के लिए बहुत घातक साबित हो सकता है।

इसे ठीक करने के लिए हमे अपनी आदतों को सुधारना होगा और अधिक से अधिक पेड़ लगाने होंगे। जिससे आक्सीजन की मात्रा बढे और फिर से प्रकृति में संतुलन कायम हो।

                             

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