दीपावली पर निबंध (Essay On Diwali Festival / Deepawali In Hindi)

दीपावली त्यौहार पर निबंध (Essay On Diwali In Hindi)
नमस्ते दोस्तों आज हम दीपावली पर हिंदी में निबंध (Essay On Diwali /Deepawali In Hindi) लिखेंगे दोस्तों यह निबंध (Kids) class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12  और College के विद्यार्थियों के लिए लिखे गए है।

हमारी Website पर आप बड़े 10 Lines Short Essay भी पढ़ सकते है। इस दीपावली पर लेख का वीडियो नीचे दिया गया है। वेबसाइट के सभी लेखो के विडियो देखने के लिए हमारे YouTube Channel पर जाये। आपसे निवेदन है की हमारे Channel को Subscribe Now करें।

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दीपावली त्यौहार पर निबंध (Essay On Deepawali In Hindi)


प्रस्तवना

भारत में कई प्रकार के त्यौहार मनाये जाते है, जिसमे से एक है दिवाली ये रौशनी का त्यौहार है। जो अंधकार रूप बुराई को समाप्त करता है। इस त्यौहार का हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है।

ये त्यौहार बड़ो से लेकर बच्चो तक के लिए खुशियाँ लेकर आता है। इस त्यौहार में सभी लोग एक दुसरे को बधाई देते है। आतिशबाजी इस त्यौहार की रौनक को और बढ़ा देते है। इस दिन पूरा देश दीपक की रौशनी से जगमगा उठता है।

दीपावली त्यौहार के दर्शन आपको आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, आर्थिक इन तीनो में होते है, जो इसे विशेष बना देते है। दीपावली हमारे धर्म, ईश्वर पर आस्था, और भक्ति भावना के सम्बन्ध को जोड़ता है।


दीपावाली त्यौहार निबंध 

दिवाली त्यौहार सभी के लिए खुशिया लेकर आता है। विशेषकर ये बच्चे लिए सबसे ज्यादा मजेदार है क्योकि इस दिन बच्चो को नए नए कपडे और आतिशबाजी करने का मौका मिलता है। इस त्यौहार को हम प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाते हैं।

दिवाली नवंबर के महीने में मनाई जाती है। यह त्योहार अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। इसे दीपों का त्योहार भी कहते हैं क्योंकि इस दिन दीपों से पूरा देश जगमगाहट उठता है।

दीपावाली मनाने की पीछे पौराणिक कथा  

पौराणिक कथानुसार रावण माता सीता का हरण करके लंका ले गया था। तब भगवान राम ने रावण का वध किया और अपना 14 वर्ष का वनवास पूर्ण करके अयोध्या लौटे थे, जिस ख़ुशी में अयोध्या वासियों ने घी के दीप जलाकर भगवान् राम का स्वागत किया तब। से इस दिन को दीपावली के रूप में मानते है। 

धनतेरस

दिवाली से एक दिन पहले धनतेरस आती है इस दिन बाजार में बहुत ज्यादा भीड़ होती है लोग बाजार से गन्ना, पूजन सामग्री, नए कपडे, मिठाई और पठाखे खरीदते है

दिवाली कैसे मनाते है 

दीपावली त्यौहार लगातार तीन दिनों चलता है दिवाली त्यौहार आने से कुछ सप्ताह पहले ही लोग इसकी तैयारी में लग जाते है दिवाली के लिए बच्चो को स्कूल से 10 से 15 दिन की छुट्टियो के साथ होमवोर्क करने को मिलता है इस दिन सरकारी कार्यालय की भी छुट्टिया रहती है।

घर और मंदिरों की साफ़ सफाई की जाती है और रंग रोगन किया जाता है ऐसी मान्यता है की जिस घर में सफाई होती है, वही लक्ष्मी माता विराजमान होती है

इस दिन माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व है माता लक्ष्मी धन की देवी और गणेश जी रिधि सिद्धि सुख समृधि के दाता है।

शाम होने के साथ सभी पूजा की तैयारी में लग जाते है बच्चो को नए कपडे पहने के के लिए बोलते ही उनकी ख़ुशी का ठिकान नहीं रहता

पूजा शुरू होने से पहले थाली में दीये जलाकर घरो की छतो पर और मंदिरों में रखने के लिए जाते है उसके पश्चात् माता लक्ष्मी और गणेश जी को भोग लगाकर उनकी पूजा कि जाती है

इसके बाद सभी आस पड़ोस के लोगो और रिश्तेदारों के घर जाकर दिवाली की बधाई देते है बच्चे बड़ो के चरण स्पर्श करते है, जिसके बदले बड़े उनको मिठाई और पठाखे देते है

इसके बाद सभी परिवार लोग मिलकर पठाखे चलते है, ये कार्यक्रम देर रात तक चलता है उसके बाद सभी मिल बैठकर स्वादिष्ट पकवानों का आनंद लेते है और उसके पश्चाता सभी विश्राम करते है


गोर्वधन पूजा 

गोवर्धन ये दिवाली के दूसरे दिन मनाया जाता है इस अन्नकूट का दिन भी कहते है इस दिन गाय की पूजा की जाती है

स्त्रिया घर के बहार गाय के गोबर से गोवर्धन बनाकर उसकी पूजा करती है अन्नकूट के दिन कई जगह भंडारे होते है जिसमे शामिल होकर लोग प्रसाद ग्रहण करते है

गोवर्धन की कथा के अनुसार इंद्र के प्रकोप के कारण गोकुल में बाढ़ आ गयी थी तब भगवान् कृष्णा ने गोवर्धन पर्वत को अपनी (चिट्टी) छोटी ऊँगली से उठा लिया

जिसके निचे गोकुल वासियों ने शरण ली और बाढ़ से सबकी रक्षा की जिसे हम गोवर्धन त्यौहार के रूप में मानते है


आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्त्व

जैन धर्म के अनुसार चौबीसवें तीर्थंकर, महावीर स्वामी मोक्ष की प्राप्ति दिवाली के दिन हुई थी और इसी दिन गौतम गणधर को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ था।

ऐतिहासिक काल में मुगलों के समय भी दीपावली त्यौहार को मनाया जाता है जिसमे 40 गज ऊँचे बाँस पर एक बड़ा दीपक जलाया गया था बादशाह जहाँगीर भी दिवाली मनाते थे


उपसंहार 

दीपावली त्यौहार बुराई पर अच्छाई की विजय का त्यौहार है इसलिए हमे भी अपने अन्दर की बुराई के रावण को समाप्त करना चाहिए आज दिवाली को लोग उतना जोर शोर से नहीं मानते है।

क्योंकी वे केवल आनंद को महत्त्व देते है लेकिन दिवाली मनाने का अर्थ है भगवन की इस पवित्र भूमि को धर्म के पथ पर ले जाना है दिवाली को धार्मिक और आस्था के महत्व के लिए ही मनाये

जहा तक हो सके बिना आतिशबाजी के दिवाली मनाये जिससे हमारे पर्यावरण को नुकसान ना हो

दीपावली पर माता-पिता अपने बच्चो का खास ख्याल रखे खास तौर पर आतिशबाजी करते समय ताकि बिना किसी नुकसान के साथ दिवाली का आनन्द ले सके। 

दोस्तों ये था दिवाली त्यौहार पर लेख हिंदी में उम्मीद करता हु दोस्तों आपको दीपावली पर निबंध (Essay On Deepawali In Hindi) जरुर पसंद आया होगा। अगर पसंद आये तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे। धन्यवाद