होली पर निबंध हिंदी में (Essay On Holi In Hindi) (Nibandh)

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नमस्ते दोस्तों आज हम होली पर हिंदी में निबंध (Essay On Holi Festival In Hindi) लिखेंगे दोस्तों यह निबंध (Kids) class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12  और College के विद्यार्थियों के लिए लिखे गए है।

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होली पर निबंध (Essay On Holi In Hindi)


प्रस्तावना 

जब हमारे कानों में गूंज उठता है। बुरा न मानो होली है तो ये हमें एहसास दिलाता हैंं कि होली के दिन नजदीक है। होली के दृश्य और खुशियां हमारी आंखों के सामने आ जाती है।

भारत में मनाए जाने वाले सभी पर और त्योहार का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है और इन सभी पर्वो और त्योहारों का संबंध किसी ना किसी घटना से जुड़ा हुआ है।

इन महत्वपूर्ण त्योहारों में दशहरा, दिवाली, रक्षाबंधन, रामनवमी, मकर, सक्रांति, कृष्ण जन्माष्टमी जैसे मुख्य त्योहार आते हैं। इन त्योहारों में से एक होली भी है। होली भारत में हिंदू समाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि यह हमारी भगवान की आस्था से संबंधित है।

होली कब मनाई जाती है

जैसा कि हम सभी जानते हैं। भारत में पूरे साल कोई ना कोई त्यौहार आता है। हर त्योहार का किसी ने किसी ऋतु या मौसम से इसका संबंध होता है।

होली त्योहार भी ऋतु से संबंधित ही है। यह त्यौहार शरद ऋतु की समाप्ति पर और ग्रीष्म ऋतु के आगमन के मध्य का जो समय आता है, उसके बीच ही होली त्योहार को मनाया जाता है। यह ऐसा मौसम होता है, जिसमें ज्यादा सर्दी नहीं नहीं होने की वजह से नहाने में ज्यादा ठंड भी नहीं लगती है।

होली हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है इसलिए इसे फाल्गुनी भी कहते हैं। ये इंग्लिश कैलेंडर के अनुसार मार्च के महीने में मनाई जाती है।

इस दिन घर पर बनाए गए पकवानों का देवताओं को भोग लगाया जाता है। बिना भोग लगाएं भोजन ग्रहण करना वर्जित है। इस दिन अन्न की आहुति दी जाती है, जिसमें गेहूं की बालियों को होलिका दहन में पकाया जाता है। इस दिन होलिका की परिक्रमा और पूजा की जाती है। इसके बाद सभी एक दूसरे को गुलाल और अबीर लगाते हैं।

भारतीय त्यौहार होली विदेशों में प्रसिद्ध

होली भारत में ही नहीं बल्कि नेपाल में भी बनाई जाती है। इसकेअलावा विदेशों में भी होली बहुत ही ज्यादा प्रचलित है, बस फर्क इतना है की वहा इस दुसरे नाम से बुलाते है और वहा इसे  मनोरंजन के लिए मनाई जाती है जबकि भारत में होली का संबंध भगवान की आस्था और विशेष प्रयोजन से है। वैसे भारत की होली की तो बात ही कुछ और है।

भारत में जिस तरीके से होली मनाई जाती है और जो आयोजन होते हैं। उसको देख कर विदेशी सैलानी भी भारत आकर होली देखने और खेलने से खुद को नहीं रोक पाते हैं इसीलिए होली के दिन भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है।

होली मनाने के पीछे पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्यकशिपु असुर जाति का अत्याचारी और निर्दयी राजा था। उसके अत्याचार के कारण वहां की प्रजा भी बहुत दुखी थी।

हिरण्यकशिपु को भगवान से वरदान मिला था की कि कोई नहीं मार सकता है। इसी के घमंड में अँधा होकर उसने स्वयं को भगवान मान लिया और अपनी प्रजा को भी अपनी पूजा करने के लिए विवश किया।

हिरण्यकशिपु के पुत्र का नाम प्रहलाद था। वहा भगवान् विष्णु का बहुत बड़ा उपासक था। प्रह्लाद अपने पिता द्वारा स्वय को भगवान मानने की बात का विरोध किया करता था, जिसके कारण हिरण्यकशिपु क्रोधित हो जाता था।

प्रहलाद अपने पिता को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए कहता और भगवान विष्णु की भक्ति करने के लिए बोलता था। मगर हिरण्यकशिपु को अहंकार और शक्ति का इतना घमंड हो गया की वह खुद को भगवान मानता था।

हिरण्यकशिपु को जब पता चला की उसका पुत्र प्रहलाद दिन रात भगवान् विष्णु की आरधना करता है। अपने पिता की नहीं तब उसे इतना क्रोध आया की उसने प्रहलाद को मरने के लिए कई षड्यंत्र रचे मगर वह असफल रहा। अंत में उसे अपनी बहन होलिका की याद आई।

होलिका को वरदान मिला था की वहा आग में नहीं जल सकती है। इसी का फायदा उठा कर उसने प्रहलाद को आग में जलने की चाल चली और अपनी बहन के पास गया और उसको बोला की तुम प्रहलाद गोद में लेकर आग में बैठ जाना।

तब होलिका हिरण्यकशिपु के कहे अनुसार प्रहलाद को गोद में लेकर लकडियो में ढेर पर बैठ गयी। मगर प्रहलाद भगवान विष्णु का भक्त था तो उसे भला क्या हो सकता था। उल्टा होलिका अपने वरदान में मिली आग में ही जल कर राख हो गयी और भगवान् विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद को बचा लिया। इसी घटना को हम सब होली के दिन यानि होलिका दहन के रूप में मनाते है।

इसके बाद भगवान् विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का भी अंत कर उसके आतंक से सबको मुक्त किया और हिरण्यकशिपु को उसके बुरे कर्मो की सजा मिली। इस तरह धर्म की अधर्म पर विजय हुई।

होलिका दहन 

होली के दिन के समय सभी लोग खरीदारी करने में व्यस्त रहते है। इस दिन बाजार में बहुत भीड़ होती है लोग गुलाल, पिचकारियाँ, मिठाई, और उपहार ख़रीदने में लगे रहते है। पूरा बाजार रंगों और मिठाइयों से सजा रहता है

होली के दिन शाम को होलिका दहन होता है इसके लिए लोग होली वाली जगह पर एकत्रित हो जाते है। होलिका दहन एक बड़ी खुली जगह पर किया जाता है। वहा कुछ सुखी लकडियो और उसके बीच सुखा पेड़ लगाया जाता है। होलिका में गोबर के बने उपलों की माला बनाकर भी डाली जाती है। शाम को होलिका दहन होने से पहले स्त्रिया पूजा अर्चना करती है।

इसके बाद तय समय और मुहर्त  के अनुसार होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन के कुछ समय बाद सुख पेड़ को कुछ लोग रस्सी से बांधकर बहार निकलते है फिर आग थोड़ी कम होने पर लोग गेहूं की बालियों को होलिका की आग में भूनते है और उसमे से कुछ अंगारे घर लेकर जाते है फिर सभी लोग घर जाकर एक साथ भोजन करते है।

होलिका दहन का दूसरा दिन धुलंडी (रंग वाली होली)

होलिका दहन के दुसरे दिन धुलंडी मनाई जाती है। जिसे हम रंग वाली होली भी कहते है। इस दिन बच्चे सुबह होने से पहले ही रंग से भरी पिचकारियाँ लेकर छत पर चढ़ जाते है और आने जाने वाले लोगो पर रंग से भरी पिचकारियाँ चलाते है।

इस दिन सभी लोग एक दुसरे को प्रेम से रंग लगाते है। हमे प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करना चाहिए जो हानि रहित होते है जिससे हम रंगों का आसानी से आनंद उठा सकते है। मगर लगाने का मतलब ये नहीं की कही भी लगा दे।

रंग लगते समय नाजुक अंगो का ध्यान रखे और रासायनिक रंगों से बचे क्योकि रासायनिक रंग हमारी त्वचा के लिए लिए काफी नुकसानदायक होते है। क्योकि कई बार इनके कारण लोगो की खुशिया मातम में बदल जाती है।   

होली त्यौहार हमे मौका देता है की हम अपनी दुश्मनी और बैर भाव मिटा कर फिर एक हो जाये और इस होली त्यौहार का पूरा आनंद ले। इस दिन हर जगह होली के रंग और पिचकारियो की बोछार होती है। जिनको देखते ही ऐसा मन करता है की ये त्यौहार समाप्त ही ना हो और ऐसी से चलता रहे।

इस दिन कई लोग एक साथ टोली बनाकर ढोल नगाडो के साथ भगवान के भजन करते हुए गली-गली में घूमते है जो माहौल को और भी खुशनुमा और मनमोहक बना देता है। होली के दिन कई जगह पर भांग और शर्बत के विशेष आयोजन भी होते है। 

भारत के हर राज्य में होली अलग तरीके से मनाई जाती है ख़ासतौर पर वृन्दावन, गोकुल, बरसाने, और ब्रज की होली सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, जिसे देखते ही आप खुद को रोक नहीं पायेगे।

ये त्यौहार काफी देर तक चलता है इसके बाद सभी लोग नहा धोकर एक दुसरे के घर होली की बधाई देने घर जाते है और वहा शर्बत और पकवानों का आनंद लेते है तो इस तरह से होली त्यौहार का समापन हँसी और खुशियों के साथ होता है।

आधुनिक होली का रंग 

पुराने समय में होली को आस्था और खुशिओं के साथ मनाया जाता था मगर आज भांग और शर्बत के नाम पर नशेबाजी और अश्लील गाने और नृत्य होने लगे है। जिसने इस पवित्र त्यौहार की रौनक को कम कर दिया है।

पहले जिस तरह से हँसी ख़ुशी के साथ होली मनाई जाती थी मगर अब उस तरह से लोग इसे आनंद पूर्वक नहीं मनाते है। होली हमारे संस्कृति की नीव है। हमे इसका सम्मान करना चाहिए।  

उपसंहार  

होली एक पवित्र त्यौहार है तो हम भगवान और भक्त की डोर से बांध कर रखता है। ये दिन हम दुश्मनी भुलाकर एक होने का मौका देता है। जिस तरह होलिका नामक बुराई आग में जल कर समाप्त हुई उसी तरह हमे भी अपने बुरे कर्मो को छोड़ कर अच्छे कर्म करने चाहिए। 

हम सबको होली त्यौहार को एक साथ मिलझूलकर खुशियों के साथ मनाना चाहिए। दुश्मनी से कभी कुछ हासिल नहीं होता है इसलिए दुसरे से ईर्ष्या और नफरत भुलाकर मन से अपनाकर रिश्ते को फिर से जोड़ना चाहिए। होली त्यौहार को मनाने का असल अर्थ यही होता है। खुशियाँ मिलजुलकर बाटें    

दोस्तों तो ये था Holi Par Nibandh Hindi mein उम्मीद करता हूँ। होली पर निबंध हिंदी में (Essay On Holi In Hindi) आपको जरुर पसंद आया होगा। अगर पसंद आये तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे। धन्यवाद