जल प्रदूषण पर हिंदी में निबंध (Essay On Water Pollution In Hindi)

ESSAY ON WATER POLLUTION IN HINDI

नमस्ते दोस्तों आज हम जल प्रदूषण निबंध हिंदी में (Essay On Water Pollution In Hindi) लिखेंगे दोस्तों यह जल संरक्षण पर निबंध (Kids) class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12  और College के विद्यार्थियों के लिए लिखे गए है।

हमारी Website पर आप 10 Lines Short Essay भी पढ़ सकते है।। इस (Jal Pradushan) वायु प्रदूषण पर लेख का वीडियो नीचे दिया गया है। वेबसाइट के सभी लेखो के विडियो देखने के लिए हमारे YouTube Channel पर जाये। आपसे निवेदन है। की हमारे Channel को Subscribe Now करें।


जल प्रदूषण एक समस्या पर हिंदी में निबंध (Essay Water Pollution)


प्रस्तवना


भगवान् ने पृथ्वी को सबसे अनमोल अमृत जो दिया है वो है जल जो हमारी सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है मगर आज जल प्रदूषण भारत की ही नहीं पुरे विश्व के लिए सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है।

इसके लिए देश की बड़ी-बड़ी संस्थाए इसके समाधान में जुटी हुई है। हमारे शरीर के लिए स्वच्छ बेहद जरुरी है। मनुष्य के शरीर में 60 फीसदी जल होता है। अगर इसमें असंतुलन हो जाए तो कई रोग उत्पन्न कर हो जाते है। 

हमारी पृथ्वी पर जल सीमित मात्रा में है परंतु पीने योग्य जल मात्रा 2 से 7 प्रतिशत ही मोजूद है, शेष जल समुन्द्र का है जो खरा है। इस ताजे जल का तीन चौथाई बर्फ के रूप में जमा है। शेष एक चौथाई भाग भूमिगत के रूप में है।

पृथ्वी पर जितना जल है, उसका केवल 0.3 प्रतिशत भाग ही स्वच्छ एवं साफ़ है। जिसका हम पीने और दैनिक कार्य में करते है और यही बचा हुआ जल प्रदूषित हो रहा है। 


जल प्रदूषण क्या है? (परिभाषा) (Defination of Water pollution)


जब जल में बाहरी हानिकारक पदार्थ के घुल जाने पर जल की गुणवत्ता कम हो जाये तो ऐसा जल मनुष्य और जीव जन्तुओ के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है तो इसे ही जल प्रदूषण कहते है।

यदि इसे छोटी और सरल भाषा में समझा जाए तो हम इस तरह समझ सकते है की जल का दूषित होना ही जल प्रदूषण कहलाता है। जिसे पीने से मनुष्य बीमार हो जाता है।  

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पिने के पानी का PH 7 से अधिकतम 8.5 तक हो सकता है, मगर इसे अधिक होने पर ये पीने योग्य नहीं रहता है। हम सभी पानी पर निर्भर है। मनुष्य एवं जानवर दोनों ही पानी के स्त्रोत नदियाँ, झीले, नलकूप से ही पानी ग्रहण करते हैं।

वैसे जल में स्वत: शुद्धिकरण की क्षमता होती है, मगर जब शुद्धिकरण से अधिक पानी में प्रदूषण फैलता है तो जल प्रदूषण होने लगता है। यह समस्या पानी में पशु के मल, मृत जीव, विषाक्त औद्योगिक रसायन, कृषि अपशिष्ट, तेल और तपिश और नालो का दूषित पानी मिलने से होती है।


जल प्रदूषण कैसे होता है  (How does water pollution happen?)


जल प्रदूषण के कारण (Due to Water Pollution)


वायु से जल प्रदूषण


वर्तमान में वायु में प्रदुषण बहुत ज्यादा फ़ैल गया है, जिससे वर्षा आने पर वर्षा का जल वायु से होकर गुजरता है ऐसे में वायु में उपस्थित हानिकारक गैस, धुल के कण और रासायनिक पदार्थ भी जल में मिल जाते है

जिससे जल प्रदूषित हो जाता है और ये जल जहा भी जमा होता है तो वह जल भी प्रदूषित हो जाता है इसलिए वर्षा के जल में जल्दी ही कीटाणु हो जाते है

इसके अलाव कई प्राकृतिक कारणों से भी जल प्रदूषित हो जाता है जैसे: ज्वालामुखी के फटने पर उसके अपशिष्ट राख और लावा जल में मिल जाता है जिससे जल गंदा और प्रदूषित हो जाता है  बाढ़ आने से भी बाढ़ का पानी नदियों और तालाबो में मिल जाता है जिससे जल गंदा हो जाता है


खेतो से जल प्रदूषण


खेते में अनाज और सब्जिओं को कीड़ो से बचाने के लिए कई प्रकार के हानिकारक रासायनिक कीटनाशी का प्रयोग दिन प्रति दिन अधिक मात्रा में हो रहा है बाजार में भी कई प्रकार के अपमार्जक आ रहे है, जिनमे हानिकारक पदार्थो का उपयोग होता है

खेतो में कीटनाशक के अधिक उपयोग करने पर जब वर्षा होती है तो कीटनाशक युक्त पानी भूमि में पंहुच कर भूमि के पानी में मिल जाता है, जिससे जल प्रदूषित हो जाता है

हमारे घर में कपडे धोने के लिए हम जो साबुन काम में लेते है, उसका पानी भी एक जगह एकत्रित होने पर वो भूमि में पहुँच कर भूमिगत जल को प्रदूषित कर देते है


समुद्री जहाजो से जल प्रदूषण


समुन्द्र में  पेट्रोल  कीटनाशी और एनी तैलीय पदार्थों का रिसाव समुद्री जल प्रदूषण का बड़ा कारण है। जिससे बड़ी मात्रा में तेल समुन्द्र में फ़ैल जाता है, जिससे जल प्रदूषण होता है

इसका असर पानी में रहने वाले जीवों की श्वसन क्रिया पर पड़ता है क्योकिं समुन्द्र के जल पर तेल की परत बन जाती है जिससे आक्सीजन जल को पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाती है

पेट्रोल का आयात-निर्यात समुद्री मार्गों से किया जाता है। किसी कारण से जहाज दुर्घटना का शिकार हो जाता है तो उसके डूबने आदि से या तेल के समुद्र में फैलने से जल प्रदूषित हो जाता है।


अम्लीय वर्षा से जल प्रदूषण


वर्तमान में अधिक वायु प्रदूषण हो चूका है  जिसके कारण अम्लीय वर्षा होने का खतरा बना रहता है ऐसे में अगर अम्लीय वर्षा होती है तो पीने के लिए बने बांध, नदियाँ, तालाब और अन्य जल संसाधन भी प्रभावित होते है

अम्लीय वर्षा से खेत को की फसल नष्ट हो जाती है, इमारतो को नुकसान होता है और अम्लीय वर्षा से ताम्बे के बने पदार्थ अधिक प्रभावती होते है क्योंकि अम्ल और तांबा मिलकर जहरीला पदार्थ बनाते है जो जल को भी जहरीला कर देता है


मृत जीवों  से जल प्रदूषण 


नदी और तालाब में मानव और पशुओं के शव नदियों में प्रवाहित कर दिया जाता हैं। जिससे उनके सड़ने से उनमे कवक और बैक्टीरिया उत्पन्न हो जाते है जो जल में मिल कर जल को दूषित कर देते है


विस्फोट सामग्री के परिक्षण से जल प्रदूषण


आज कई देश अपनी ताकत बढ़ने के लिए आधुनिक विस्फोटक हथियारों का निर्माण करते है और इनका परिक्षण समुन्द्र में विस्फोट कर किया जाता है जिससे जल प्रदूषण होता है


जल प्रदूषण के प्रभाव (Effects of Water Pollution)


पीने के पानी का स्त्रोत प्रदूषण के कारण प्रभावित होता है तो इसका असर सीधा हमारे जीवन पर पड़ता है दूषित जल से पेड़ पौधे ही नहीं बल्कि खेतो की फसल के साथ उसमे उत्पन्न अनाज भी प्रभावित होता है जिसे खाने से हमारे स्वस्थ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है

दूषित जल से भूमि की उर्वरता क्षमता भी कम हो जाती है जिससे फसल उगने में कठनाई होती है और यही से भूमि की बंजर स्थति उत्पन्न होती है इसलिए जल का शुद्ध और साफ होना जरुरी है

जल प्रदूषण का असर देश के प्रत्येक क्षेत्र पर होता है क्योंकि पानी का उपयोग सभी क्रियाओं में होता है पानी किसी देश के लिए सबसे बड़ी समस्या है तो उसका विकास भी पानी पर ही निर्भर है

जल प्रदूषण किसी भी देश के लिए एक खतरा होता है एक गणना के अनुसार भारत में होने वाली दो तिहाई बिमारियों का कारण जल प्रदूषण है

जल प्रदूषण का बुरा असर समुन्द्र में रहने वाले जीवों पर भी पड़ता है क्योकि रासायनिक और अन्य जहरीले अपशिष्ट पदार्थो की निकसी समुन्द्र में होने से पानी दूषित हो जाता है इसलिए उमसे उपस्थित मछलियों  मरने जाती है

समुन्द्र के आस पास रहने वाले लोग का जीवन भी मछलियों से चल रहा है इसका असर  मछुआरों की अजीविका पड़ता है प्रदूषण के कारण ही मछुआरे मछलियों पकड़ने अब समुन्द्र में अधिक आगे और गहराई तक अपनी नाव ले जाते है जो उनके जीवन के लिए भी खतरा होती है

आज प्रदूषण के कारण शुद्ध जल नहीं होने से लोग नालियों और गंदे पानी के नालों से खेती कर रहे है, इससे भूमि की उर्वरक क्षमता और उत्पादन कम दोनों हो गए है

गंदे पानी में उपस्थित हानिकारक धातु और रासायनिक पदार्थ फसलीय पौधो में प्रवेश करके अनाज और सब्जिओ में भी आ जाते है जो हमारी सेहत के लिए खतरनाक है

इस तरह हम ये कह सकते है की जल प्रदूषण होने से एक क्षेत्र ही नहीं बल्कि जल की पूरी व्यवस्था ही बिगड़ जाती है जिसका असर पूरी प्रकृति और जीवों पर पड़ता है


जल प्रदूषण से होने वाली बीमारियां


जल प्रदूषण के कारण पूरे विश्व में बिमारियों से हर दिन 14,000  लोगो की मौत हो जाती है जो एक गंभीर समस्या है दूषित जल से इससे टाईफाइड, पीलिया, हैजा, गैस्ट्रिक आदि बीमारियां हो जाती हैं।

प्रदूषित पानी से चर्म रोग, पेट रोग, पीलिया, हैजा, दस्त, उल्टीयां, टाइफाईड बुखार आदि रोग हो सकते हैं। गर्मी और  बरसात में ये ज्यादा प्रभावी होते है।


जल प्रदूषण रोकने के उपाय


जल प्रदूषण को रोकने के लिए सबसे पहले घर के आस पास साफ़ सफाई रखे और नालियों को प्रतिदिन नियमित रूप से साफ़ करें।

ग्रामीण इलाकों में जल निकास के लिए पक्की नालियों नहीं होती है, इसी कारण वहा से निकलने वाला जल अव्यवस्थित रास्ता बनता हुआ नदी, नहर और जल स्रोत तक पहुँच जाता है।

नालियों की व्यवस्था जल स्त्रोतों से दूर करनी चाहिए मल, घरेलू पदार्थों एवं कूडे़ कचरे की व्यवस्था अलग होनी चाहिए कचरे में उपस्थित हानिकारक पदार्थो को अलग करना चाहिए जिससे जल प्रदूषण कम किया जा सके।

प्रदूषित जल को विभिन्न वैज्ञानिक विधियों के द्वारा उपचारित करके उनको पुन: प्रयोग हेतु बनाना चाहिए। जिससे प्रदूषित जल की मात्रा को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी।

कुओं, तालाबों और स्वच्छ जल स्त्रोत के स्त्रोतों  से कपडे़ धोने, पशुओ के नहलाने तथा मनुष्य के नहाने, बर्तनों को साफ करने और उसे दूषित करने वालो पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए। तथा कड़े जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए।

कुओं, तालाबों एवं अन्य जल साधनों में जल को शुद्ध करने वाली दवाओं का प्रयोग करना चाहिए। जल प्रदूषण से होने वाले नुकसान और उसको कम करने वाले तरीको को लोगो को बताकर प्रेरित करना चाहिए।

खेतों, बगीचों में कीटनाशक, जीवनाशक एवं अन्य रासायनिक पदार्थों, उर्वरकों के उपयोग को कम करने और इसकी जगह प्राकृतिक गोबर खाद के उपयोग पर जोर देना चाहिए।

तालाबों एवं अन्य जल स्त्रोतों की नियमित रूप से जाँच, परीक्षण, सफाई, सुरक्षा होनी चाहिए है। सिंचाई वाले क्षेत्रों, खेतों में जलभरण, भूमि की क्षारीयता , लवणीयता, अम्लीयता की समस्याओं के निदान के लिए जल शुद्धिकरण एंव प्रबंधन विधियों का ही उपयोग करना चाहिए। सरकार को जल प्रदूषण नियंत्रण कानूनों को अधिक कठोर  बनाना आवश्यक है।


उपसंहार


स्वस्थ जीवन के लिए  शुद्ध जल होना बहुत क्योंकि जल प्रदूषण मानव के साथ प्राकृतिक के लिए भी नुकसानदायक शुद्ध जल की मात्रा पहले ही बहुत कम है।

अगर जल को प्रदूषित करेगे तो जल होते हुए भी पीने लायक नहीं रहेगा इसलिए इसे आज के लिए नहीं आने वाले कल के लिए भी बचाना होगा और अपनी आदतों को सुधारते हुए जल को बचाना होगा ।

दुसरो को भी जल को प्रदूषित करने से रोकना होगा जल को स्वच्छ रखना आसान है मगर उसे फिर से शुद्ध करना बहुत मुश्किल है इसलिए आज से ही जल प्रदूषण को रोकना शुरू करें।